
देवप्रयाग टाईम्स 27 जुलाई 2026
देवप्रयाग/ टिहरी गढ़वाल की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच टिहरी गढ़वाल जनपद के भिलंगना विकासखंड अंतर्गत थाती गाँव की चैतादेवी ने अपनी लगन और मेहनत से सफलता की नई इबारत लिखी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘रीप’ ( परियोजना के सहयोग से संचालित पोल्ट्री फार्म के जरिए वह न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं।
चैतादेवी भैरवनाथ स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हैं तथा महादेव आजीविका महिला ग्राम संगठन एवं संगम स्वायत्त सहकारी (डांगी CLF) से जुड़ी हुई हैं। कुछ समय पूर्व तक सीमित साधनों के कारण उनका परिवार आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा था। लेकिन स्वरोजगार अपनाने की उनकी मजबूत इच्छाशक्ति ने उन्हें राह दिखाई।
चैतादेवी ने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए कुल ₹75,000 की लागत से गाँव में मदर यूनिट पोल्ट्री फार्म की शुरुआत की। इसमें उन्हें REAP परियोजना से ₹22,500 की वित्तीय सहायता मिली, जबकि ₹37,500 का बैंक ऋण और ₹15,000 की अपनी बचत का निवेश किया।
वर्तमान में उनके फार्म में लगभग 100 मुर्गियाँ हैं, जिनका वे आधुनिक तकनीक और नियमित देखभाल के साथ प्रबंधन कर रही हैं।
तीन माध्यमों से प्रतिमाह बंपर आय
आधुनिक पशुपालन तकनीकों को अपनाकर चैतादेवी तीन प्रमुख तरीकों से आय अर्जित कर रही हैं:
- अंडा उत्पादन: फार्म से प्रति सप्ताह लगभग 400 अंडों का उत्पादन होता है। ₹8 प्रति अंडे की दर से प्रतिमाह करीब ₹12,800 की बिक्री हो जाती है।
- चूज़ों की बिक्री: हर महीने लगभग 25 चूजों की बिक्री से ₹1,000 की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
- मांस बिक्री: स्थानीय बाजार व मीट विक्रेताओं को प्रतिमाह करीब 50 मुर्गियाँ बेचकर ₹10,000 तक की कमाई होती है।
इस प्रकार, पोल्ट्री फार्म से होने वाली नियमित आय ने उनके परिवार का जीवन स्तर सुधार दिया है।
कुक्कुट पालन आजीविका का सशक्त माध्यम: मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
मामले में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी. के. शर्मा ने बताया कि REAP और पशुपालन विभाग के संयुक्त प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस व्यवसाय से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक लाभ के साथ-साथ कम लागत में प्रोटीनयुक्त आहार भी मिल रहा है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
डॉ. शर्मा ने आगे जानकारी दी कि विभाग द्वारा जनपद में ‘बैकयार्ड पोल्ट्री’, ‘कुक्कुट वैली’ और ‘ब्रायलर फार्म’ जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके तहत पालकों को नि:शुल्क चिकित्सीय सुविधा, औषधियां और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने चैतादेवी को अन्य किसानों के लिए रोल मॉडल बताते हुए अधिक से अधिक ग्रामीणों से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।
चैतादेवी की यह सफलता साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं के लाभ और खुद की मेहनत से ग्रामीण महिलाएँ भी सफल उद्यमी बन सकती हैं।
