देवीथात का गोठी मेला: जहाँ सदियों पुरानी आस्था, देव परंपरा और प्रकृति का होता है अद्भुत संगम

देवप्रयाग/नई टिहरी (गिरीश भट्ट): विकासखंड जौनपुर के अंतर्गत तहसील नैनबाग की पट्टी ईडवालस्यूँ स्थित प्राचीन देवस्थल देवीथात में आयोजित होने वाला ऐतिहासिक ‘गोठी मेला’ क्षेत्र की समृद्ध लोक-आस्था, सांस्कृतिक विरासत और देव परंपरा का जीवंत प्रतीक है। 31 जुलाई को यह मेला पूरे हर्षोल्लास, धार्मिक श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। जौनपुर क्षेत्र में इस मेले के साथ ही प्रमुख पर्व-त्योहारों की शुरुआत की भी मान्यता जुड़ी हुई है।

  • माँ गौरजा और भगवान नागराज का दिव्य मिलन: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवीथात में माँ गौरजा का दिव्य निवास है। भगवान नागराज वर्ष में दो बार (बैसाख द्वितीया और भाद्रपद में जन्माष्टमी के बाद) अपने सिद्धधाम नागटिब्बा से दिव्य घोड़ी पर सवार होकर अपनी बहन माँ गौरजा से मिलने यहाँ पहुँचते हैं।
  • मिट्टी के नागदेवता की अनूठी पूजा: मेले की सबसे खास परंपरा यह है कि ग्वाल-बाल बुग्याल में मिट्टी से भगवान नागदेवता का स्वरूप बनाकर उन्हें श्रीकृष्ण के रूप में पूजते हैं। केदार पाती, दही, मक्खन, धूप, दीप और पुष्प अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, उत्तम कृषि और पशुधन की उन्नति की मंगल कामना की जाती है।
  • प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र: देवदार, बांज और बुरांश के घने जंगलों से घिरा देवीथात आध्यात्मिक शांति के साथ हिमालयी छटा का अद्भुत अनुभव कराता है। यहाँ से नागटिब्बा और कोट श्रीकोट के दिव्य दर्शन होते हैं।
  1. पूर्व सैनिक एवं ग्राम प्रधान भटवाड़ी सुनील सेमवाल ने बताया कि मेले में पट्टी ईडवालस्यूँ और दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुँचकर माँ गौरजा और भगवान नागराज का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी यह मेला नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोकसंस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बना हुआ है।

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