
देवप्रयाग टाईम्स
देवप्रयाग /टिहरी गढ़वाल, 24 अगस्त: जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में सोमवार को वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित लंबित प्रकरणों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान जिले में वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े 10 प्रमुख प्रकरणों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों को इन मामलों का समयबद्ध और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सभी अधिकारी क्षतिपूरक वृक्षारोपण और वन भूमि हस्तांतरण के मानकों (SOP) का गहराई से अध्ययन करें और उसी के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाएं। उन्होंने निर्देशित किया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए लैंड पार्सल में यदि कोई समस्या आती है, तो GIS एक्सपर्ट से उसी दिन उसका परीक्षण कराया जाए। इसके बाद अधिकतम तीन दिनों के भीतर संबंधित प्रभारी वनाधिकारी को भूमि की उपयुक्तता की रिपोर्ट सौंपी जाए, ताकि एक सप्ताह के भीतर हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
प्रमुख सड़क परियोजनाओं की समीक्षा:
नैर से पुजाल्डी मोटर मार्ग (टिहरी/धनोल्टी): उपजिलाधिकारी धनोल्टी द्वारा भूमि चयन के बाद तहसील नैनबाग के ग्राम घनसी से संबंधित प्रस्ताव उपलब्ध कराया जाना बाकी है।
तेलुंगा सड़क निर्माण (प्रतापनगर): प्रभागीय वनाधिकारी ने मदननेगी उप-तहसील के ग्राम सांदणा की भूमि को क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त पाया है। अब SDM प्रतापनगर के स्तर से प्रस्ताव भेजा जाएगा।
रैंका महरगांव से मुखेम मार्ग: तहसील जाखणीधार के ग्राम गौसारी सहित तीन लैंड पार्सल वृक्षारोपण के लिए चिन्हित किए गए हैं, जिस पर वन विभाग की रिपोर्ट प्रतीक्षित है।
जयद्वार-सुरांचु मार्ग (धनोल्टी): मसोन, कांडी, और द्वारगढ़ क्षेत्र में सड़क निर्माण हेतु भूमि चयन के लिए कुल 27 लैंड पार्सल की सूची प्रेषित की गई है।
नीम बीच हस्तांतरण: इस संबंध में उपजिलाधिकारी कीर्तिनगर को आवश्यक कार्यवाही हेतु पत्र भेजा जा चुका है।
जिलाधिकारी ने अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी अधिकारी आपसी तालमेल से काम करें और लंबित रिपोर्ट व भूमि चयन की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करें।
